मन की आँखों में सजाये बेठे है...
तुझको सीने में दबाये बेठे है .....
तू मिल जाये कही किसी मोड़ पे.....
ऐ ख्वाब तेरी तस्वीर बनाये बेठे है ...
तू जहाँ भी है तेरी बात करते रहते है ..
हर लम्हा तेरी फिक्र करते रहते है ...
तू टूट कर न बिखर जाये कांच की मानिंद ..
इसलिए आईने से तेरा ज़िक्र करते रहते है ...
मेरे ख्वाब न जाने कोनसे शहरों में रहते है ...
किन गलिओं, किन घरो में चलते फिरते है...
बेशक नाउम्मीद नहीं हूँ, उम्मीद कम है लेकिन..
कभी लगता है मेरे ख्वाव् मेरे ख्वाबो में बसते हैं...
(हकीकत है मेरे ख्वाब हर शहर में रहते हैं...
हर गली, हर मोहल्ले, हर घर में चलते फिरते हैं...
बेशक उम्मीद ही नहीं, ये यकीन है मुझे...
मेरी तरह सबके ख्वाब सबकी आँखों में बसते हैं ...)